कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते |
ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम् ||१३-१८||
jyotiṣāmapi tajjyotistamasaḥ paramucyate .
jñānaṃ jñeyaṃ jñānagamyaṃ hṛdi sarvasya viṣṭhitam ||13-18||
।।13.18।। (वह ब्रह्म) ज्योतियों की भी ज्योति और (अज्ञान) अन्धकार से परे कहा जाता है। वह ज्ञान (चैतन्यस्वरूप) ज्ञेय और ज्ञान के द्वारा जानने योग्य (ज्ञानगम्य) है। वह सभी के हृदय में स्थित है।।
सुनें
ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते |
ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम् ||१३-१८||
jyotiṣāmapi tajjyotistamasaḥ paramucyate .
jñānaṃ jñeyaṃ jñānagamyaṃ hṛdi sarvasya viṣṭhitam ||13-18||
BG 13.18
समाधान करें
एक प्रकाश है जिससे तुम यह भी जानते हो कि तुम सचेत हो। वह तुम्हारे ही हृदय में बैठा है। शांति से उसकी ओर मुड़ो।
सार
एक प्रकाश जो तुम्हारे देखे सबके पीछे चमकता है।
श्वास लें
तुम भीतरी प्रकाश की ओर मुड़ते हो तुम उसके चारों ओर के अँधेरे को छोड़ते हो
ध्यान करें
किस प्रकाश से देखता है वह जिसे कोई दीप नहीं देता?
साथ ले जाएँ
अपने ही हृदय के प्रकाश की ओर लिखो, या बस उसके पास तपो।