कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
श्रीभगवानुवाच |
इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते |
एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः ||१३-२||
śrībhagavānuvāca .
idaṃ śarīraṃ kaunteya kṣetramityabhidhīyate .
etadyo vetti taṃ prāhuḥ kṣetrajña iti tadvidaḥ ||13-2||
।।13.2।। श्रीभगवान् ने कहा -- हे कौन्तेय ! यह शरीर क्षेत्र कहा जाता है और इसको जो जानता है, उसे तत्त्वज्ञ जन, क्षेत्रज्ञ कहते हैं।।
सुनें
श्रीभगवानुवाच |
इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते |
एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः ||१३-२||
śrībhagavānuvāca .
idaṃ śarīraṃ kaunteya kṣetramityabhidhīyate .
etadyo vetti taṃ prāhuḥ kṣetrajña iti tadvidaḥ ||13-2||
BG 13.2
समाधान करें
तुम्हारी देह क्षेत्र है; तुम उसे जानने वाले हो। तुम अपनी देह या विचार नहीं — तुम वह चेतना हो जो उन्हें देखती है।
सार
तुम क्षेत्रज्ञ हो, क्षेत्र नहीं।
श्वास लें
तुम क्षेत्र को देखते हो तुम जानने वाले के रूप में विश्राम करते हो
ध्यान करें
तुम्हारी देह, विचार और भावों के प्रति सचेत कौन है?
साथ ले जाएँ
उस चेतना से लिखो जो देखती है, उससे नहीं जिसे वह देखती है।