कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः |
यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ||१३-३०||
prakṛtyaiva ca karmāṇi kriyamāṇāni sarvaśaḥ .
yaḥ paśyati tathātmānamakartāraṃ sa paśyati ||13-30||
।।13.30।। जो पुरुष समस्त कर्मों को सर्वश: प्रकृति द्वारा ही किये गये देखता है तथा आत्मा को अकर्ता देखता है, वही (वास्तव में) देखता है।।
सुनें
प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः |
यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ||१३-३०||
prakṛtyaiva ca karmāṇi kriyamāṇāni sarvaśaḥ .
yaḥ paśyati tathātmānamakartāraṃ sa paśyati ||13-30||
BG 13.30
समाधान करें
हर कर्म केवल प्रकृति से होता है; स्वयं कुछ नहीं करता। बैठो और देखो कि देह कर्म करती है जबकि तुम बस साक्षी हो।
सार
प्रकृति करती है; स्वयं केवल देखता है।
श्वास लें
तुम देह को कर्म करते देखते हो तुम उसके रूप में विश्राम करते हो जो देखता है
ध्यान करें
यदि प्रकृति कर्म कर रही है, तो तुम्हारा वास्तविक कार्य क्या है?
साथ ले जाएँ
उस साक्षी को लिखो जो कुछ नहीं करता, फिर भी सब देखता है।