कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
श्रीभगवानुवाच |
प्रकाशं च प्रवृत्तिं च मोहमेव च पाण्डव |
न द्वेष्टि सम्प्रवृत्तानि न निवृत्तानि काङ्क्षति ||१४-२२||
śrībhagavānuvāca .
prakāśaṃ ca pravṛttiṃ ca mohameva ca pāṇḍava .
na dveṣṭi sampravṛttāni na nivṛttāni kāṅkṣati ||14-22||
।।14.22।। श्रीभगवान् ने कहा -- हे पाण्डव ! (ज्ञानी पुरुष) प्रकाश, प्रवृत्ति और मोह के प्रवृत्त होने पर भी उनका द्वेष नहीं करता तथा निवृत्त होने पर उनकी आकांक्षा नहीं करता है।।
सुनें
श्रीभगवानुवाच |
प्रकाशं च प्रवृत्तिं च मोहमेव च पाण्डव |
न द्वेष्टि सम्प्रवृत्तानि न निवृत्तानि काङ्क्षति ||१४-२२||
śrībhagavānuvāca .
prakāśaṃ ca pravṛttiṃ ca mohameva ca pāṇḍava .
na dveṣṭi sampravṛttāni na nivṛttāni kāṅkṣati ||14-22||
BG 14.22
समाधान करें
जब भाव उठें — स्पष्टता, अशांति, भ्रम — न उन्हें परे धकेलो, न उनका पीछा करो। बस उन्हें बीतते देखो।
सार
जो उठे, न उसका विरोध, न पीछा।
श्वास लें
तुम भाव को आने देते हो तुम उसे बिना पीछा किए जाने देते हो
ध्यान करें
किस बीतते भाव से तुम लड़ते हो, और किससे चिपकते हो?
साथ ले जाएँ
एक भाव लिखो जिसे तुम आज बस आने और जाने दे सको।