कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः |
निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ||१४-५||
sattvaṃ rajastama iti guṇāḥ prakṛtisambhavāḥ .
nibadhnanti mahābāho dehe dehinamavyayam ||14-5||
।।14.5।। हे महाबाहो ! सत्त्व, रज और तम ये प्रकृति से उत्पन्न तीनों गुण देही आत्मा को देह के साथ बांध देते हैं।।
सुनें
सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः |
निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ||१४-५||
sattvaṃ rajastama iti guṇāḥ prakṛtisambhavāḥ .
nibadhnanti mahābāho dehe dehinamavyayam ||14-5||
BG 14.5
समाधान करें
तीन शक्तियाँ — स्पष्टता, अशांति और भारीपन — तुममें से चलती हैं। बैठो और अनुभव करो कि अभी कौन सबसे प्रबल खींच रही है।
सार
तीन शक्तियाँ तुममें से चलती हैं।
श्वास लें
तुम लक्ष्य करते हो कौन-सी शक्ति खींचती है तुम उसे बिना हिले देखते हो
ध्यान करें
तीनों में — स्पष्टता, अशांति, भारीपन — आज तुम पर कौन शासन करती है?
साथ ले जाएँ
उस शक्ति को लिखो जो अभी सबसे प्रबल खींच रही है।