कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत् |
सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः ||१८-४८||
sahajaṃ karma kaunteya sadoṣamapi na tyajet .
sarvārambhā hi doṣeṇa dhūmenāgnirivāvṛtāḥ ||18-48||
।।18.48।। हे कौन्तेय ! दोषयुक्त होने पर भी सहज कर्म को नहीं त्यागना चाहिए; क्योंकि सभी कर्म दोष से आवृत होते है, जैसे धुयें से अग्नि।।
सुनें
सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत् |
सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः ||१८-४८||
sahajaṃ karma kaunteya sadoṣamapi na tyajet .
sarvārambhā hi doṣeṇa dhūmenāgnirivāvṛtāḥ ||18-48||
BG 18.48
समाधान करें
हर अग्नि कुछ धुआँ देती है; हर सच्चे कर्म में उसकी त्रुटियाँ हैं। धुएँ को रहने दो, और अपनी अग्नि की देखभाल करो।
सार
हर अग्नि थोड़ा धुआँ साथ लाती है।
श्वास लें
तुम अग्नि को स्वीकारते हो तुम धुएँ को रहने देते हो
ध्यान करें
कौन-सा कर्म तुमने छोड़ा क्योंकि वह निर्दोष न था?
साथ ले जाएँ
उस धुएँ को लिखो जिसे तुम अपनी अग्नि के साथ स्वीकारने से इनकार करते रहे।