कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते |
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् ||२-४०||
nehābhikramanāśo.asti pratyavāyo na vidyate .
svalpamapyasya dharmasya trāyate mahato bhayāt ||2-40||
।।2.40।। इसमें क्रमनाश और प्रत्यवाय दोष नहीं है। इस धर्म (योग) का अल्प अभ्यास भी महान् भय से रक्षण करता है।।
सुनें
नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते |
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् ||२-४०||
nehābhikramanāśo.asti pratyavāyo na vidyate .
svalpamapyasya dharmasya trāyate mahato bhayāt ||2-40||
BG 2.40
समाधान करें
इस अभ्यास का थोड़ा-सा भी तुम्हें महान भय से बचाता है। तुम्हें इसमें निपुण होना ज़रूरी नहीं। चेतना की एक साँस ही पर्याप्त है।
सार
थोड़ा-सा भी, यह तुम्हारी रक्षा करता है।
श्वास लें
एक सचेत साँस तुम उसे ही पर्याप्त होने देते हो
ध्यान करें
किसी चीज़ को सहायता देने से पहले, कहाँ तुम निपुणता की प्रतीक्षा करते रहे?
साथ ले जाएँ
लिखो कि थोड़े-से अभ्यास ने भी पहले ही तुम्हारी कैसे रक्षा की है।