कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
श्रीभगवानुवाच |
प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान् |
आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते ||२-५५||
śrībhagavānuvāca .
prajahāti yadā kāmānsarvānpārtha manogatān .
ātmanyevātmanā tuṣṭaḥ sthitaprajñastadocyate ||2-55||
।।2.55।। श्री भगवान् ने कहा -- हे पार्थ? जिस समय पुरुष मन में स्थित सब कामनाओं को त्याग देता है और आत्मा से ही आत्मा में सन्तुष्ट रहता है? उस समय वह स्थितप्रज्ञ कहलाता है।।
सुनें
श्रीभगवानुवाच |
प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान् |
आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते ||२-५५||
śrībhagavānuvāca .
prajahāti yadā kāmānsarvānpārtha manogatān .
ātmanyevātmanā tuṣṭaḥ sthitaprajñastadocyate ||2-55||
BG 2.55
समाधान करें
हर लालसा छोड़कर, तुम अपने भीतर, स्वयं से तृप्ति पाते हो। बाहर से नहीं — भीतर से। अभी वहीं विश्राम करो।
सार
स्वयं में, स्वयं से तृप्त।
श्वास लें
तुम भीतर तृप्ति पाते हो तुम मन की हर लालसा छोड़ते हो
ध्यान करें
बाहर क्या खोज रहे हो जो भीतर पा सकते थे?
साथ ले जाएँ
लिखो वह जिसके लिए तुम्हें किसी की और किसी चीज़ की ज़रूरत न हो — कम से कम आज।