कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
रागद्वेषविमुक्तैस्तु विषयानिन्द्रियैश्चरन् | (or वियुक्तैस्तु)
आत्मवश्यैर्विधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति ||२-६४||
rāgadveṣavimuktaistu viṣayānindriyaiścaran .
orviyuktaistu ātmavaśyairvidheyātmā prasādamadhigacchati ||2-64||
।।2.64।। आत्मसंयमी (विधेयात्मा) पुरुष रागद्वेष से रहित अपने वश में की हुई (आत्मवश्यै) इन्द्रियों द्वारा विषयों को भोगता हुआ प्रसन्नता (प्रस्ेााद) प्राप्त करता है।।
सुनें
रागद्वेषविमुक्तैस्तु विषयानिन्द्रियैश्चरन् | (or वियुक्तैस्तु)
आत्मवश्यैर्विधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति ||२-६४||
rāgadveṣavimuktaistu viṣayānindriyaiścaran .
orviyuktaistu ātmavaśyairvidheyātmā prasādamadhigacchati ||2-64||
BG 2.64
समाधान करें
तुम संसार के सब खिंचावों के बीच चल सकते हो, इंद्रियाँ स्थिर, लालसा और विकर्षण से मुक्त — और शांति पा सकते हो। बचकर नहीं, उसी के भीतर मुक्त रहकर।
सार
संसार के भीतर मुक्त, तुम शांति पाते हो।
श्वास लें
तुम सब चीज़ों के बीच चलते हो तुम लालसा और विकर्षण को छोड़ते हो
ध्यान करें
कहाँ तुम संसार से भागने के बजाय उसके भीतर मुक्त रह सकते हो?
साथ ले जाएँ
लिखो कि तूफ़ान की शांत आँख होना कैसा लगता है।