कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना |
न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम् ||२-६६||
nāsti buddhirayuktasya na cāyuktasya bhāvanā .
na cābhāvayataḥ śāntiraśāntasya kutaḥ sukham ||2-66||
।।2.66।। (संयमरहित) अयुक्त पुरुष को (आत्म) ज्ञान नहीं होता और अयुक्त को भावना और ध्यान की क्षमता नहीं होती भावना रहित पुरुष को शान्ति नहीं मिलती अशान्त पुरुष को सुख कहाँ
सुनें
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना |
न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम् ||२-६६||
nāsti buddhirayuktasya na cāyuktasya bhāvanā .
na cābhāvayataḥ śāntiraśāntasya kutaḥ sukham ||2-66||
BG 2.66
समाधान करें
स्थिरता बिना, समझ नहीं; शांति बिना, सुख नहीं। बैठो और पाओ कि तुम्हारी अपनी शृंखला कहाँ टूटी है।
सार
शांति नहीं, सुख नहीं — शृंखला जुड़ी रहती है।
श्वास लें
तुम टूटी कड़ी को जोड़ते हो तुम शांति को बैठ जाने देते हो
ध्यान करें
तुम्हारी शृंखला की कौन-सी कड़ी — स्थिरता, समझ, शांति — सबसे कमज़ोर है?
साथ ले जाएँ
उस एक कड़ी को लिखो जिसे तुम्हें सबसे अधिक जोड़ना है।