कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते |
तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि ||२-६७||
indriyāṇāṃ hi caratāṃ yanmano.anuvidhīyate .
tadasya harati prajñāṃ vāyurnāvamivāmbhasi ||2-67||
।।2.67।। जल में वायु जैसे नाव को हर लेता है वैसे ही विषयों में विरचती हुई इन्द्रियों के बीच में जिस इन्द्रिय का अनुकरण मन करता है? वह एक ही इन्द्रिय इसकी प्रज्ञा को हर लेती है।।
सुनें
इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते |
तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि ||२-६७||
indriyāṇāṃ hi caratāṃ yanmano.anuvidhīyate .
tadasya harati prajñāṃ vāyurnāvamivāmbhasi ||2-67||
BG 2.67
समाधान करें
इंद्रियों के पीछे भागता मन वह नाव है जो दिशा से भटक जाती है। पतवार थामो और एक दिशा चुनो।
सार
अपनी दिशा चुनो; भटको मत।
श्वास लें
तुम पतवार थामते हो तुम हर हवा के खिंचाव को छोड़ते हो
ध्यान करें
तुम अपना जीवन चला रहे हो, या उसमें बहाए जा रहे हो?
साथ ले जाएँ
एक दिशा लिखो जिसकी ओर तुम अपना ध्यान थामना चाहते हो।