कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः |
निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति ||२-७१||
vihāya kāmānyaḥ sarvānpumāṃścarati niḥspṛhaḥ .
nirmamo nirahaṅkāraḥ sa śāntimadhigacchati ||2-71||
।।2.71।। जो पुरुष सब कामनाओं को त्यागकर स्पृहारहित? ममभाव रहित और निरहंकार हुआ विचरण करता है? वह शान्ति प्राप्त करता है।।
सुनें
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः |
निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति ||२-७१||
vihāya kāmānyaḥ sarvānpumāṃścarati niḥspṛhaḥ .
nirmamo nirahaṅkāraḥ sa śāntimadhigacchati ||2-71||
BG 2.71
समाधान करें
कल्पना करो कि तुम अपना दिन 'मेरा' के बोझ बिना, बिना किसी चाह के आगे खिंचे बिना बिता रहे हो। अनुभव करो वह कितना हलका है।
सार
संसार में चलो, बिना चाह, बिना 'मेरा'।
श्वास लें
तुम खाली हाथ पहुँचते हो तुम 'मेरा' शब्द को छोड़ते हो
ध्यान करें
यदि तुम एक दिन 'मेरा' छोड़ दो, तो क्या रख दोगे?
साथ ले जाएँ
एक चीज़ लिखो जिसे तुम 'मेरा' कहकर पकड़े हो, और उसे ढीला करना कैसा लगता है।