कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा |
कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च ||३-३९||
āvṛtaṃ jñānametena jñānino nityavairiṇā .
kāmarūpeṇa kaunteya duṣpūreṇānalena ca ||3-39||
।।3.39।। हे कौन्तेय ! अग्नि के समान जिसको तृप्त करना कठिन है ऐसे कामरूप, ज्ञानी के इस नित्य शत्रु द्वारा ज्ञान आवृत है।।
सुनें
आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा |
कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च ||३-३९||
āvṛtaṃ jñānametena jñānino nityavairiṇā .
kāmarūpeṇa kaunteya duṣpūreṇānalena ca ||3-39||
BG 3.39
समाधान करें
इच्छा एक अग्नि है जो जितना खिलाओ उतनी बढ़ती है। एक लौ के पास बैठो बिना ईंधन डाले।
सार
इच्छा वह अग्नि है जो कभी भरती नहीं।
श्वास लें
तुम लालसा अनुभव करते हो तुम अग्नि को खिलाना बंद करते हो
ध्यान करें
कौन-सी इच्छा तुम वर्षों खिलाते रहे जो भरने के निकट भी नहीं?
साथ ले जाएँ
एक लालसा लिखो जिसे तुम बस ईंधन देना बंद कर सको।