कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
यदृच्छालाभसन्तुष्टो द्वन्द्वातीतो विमत्सरः |
समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते ||४-२२||
yadṛcchālābhasantuṣṭo dvandvātīto vimatsaraḥ .
samaḥ siddhāvasiddhau ca kṛtvāpi na nibadhyate ||4-22||
।।4.22।। यदृच्छया (अपने आप) जो कुछ प्राप्त हो उसमें ही सन्तुष्ट रहने वाला, द्वन्द्वों से अतीत तथा मत्सर से रहित, सिद्धि व असिद्धि में समभाव वाला पुरुष कर्म करके भी नहीं बन्धता है।।
सुनें
यदृच्छालाभसन्तुष्टो द्वन्द्वातीतो विमत्सरः |
समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते ||४-२२||
yadṛcchālābhasantuṣṭo dvandvātīto vimatsaraḥ .
samaḥ siddhāvasiddhau ca kṛtvāpi na nibadhyate ||4-22||
BG 4.22
समाधान करें
यह क्षण तुम्हारे संघर्ष बिना आया। उसे ठीक वैसे ग्रहण करो जैसे वह आया, और कुछ न चाहते हुए।
सार
जो आता है उसी में संतुष्ट।
श्वास लें
तुम जो आया उसे ग्रहण करते हो तुम किसी और की चाह छोड़ते हो
ध्यान करें
क्या तुम इस क्षण के लाए से अधिक कुछ न चाह सकते हो?
साथ ले जाएँ
जो आज आया जिसका तुम्हें पीछा न करना पड़ा, उसे लिखो।