कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन |
ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा ||४-३७||
yathaidhāṃsi samiddho.agnirbhasmasātkurute.arjuna .
jñānāgniḥ sarvakarmāṇi bhasmasātkurute tathā ||4-37||
।।4.37।। जैसे प्रज्जवलित अग्नि ईन्धन को भस्मसात् कर देती है, वैसे ही, हे अर्जुन ! ज्ञानरूपी अग्नि सम्पूर्ण कर्मों को भस्मसात् कर देती है।।
सुनें
यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन |
ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा ||४-३७||
yathaidhāṃsi samiddho.agnirbhasmasātkurute.arjuna .
jñānāgniḥ sarvakarmāṇi bhasmasātkurute tathā ||4-37||
BG 4.37
समाधान करें
जैसे अग्नि लकड़ी को राख कर देती है, स्पष्ट समझ अतीत के भार को जला देती है। एक पुराने बोझ को उस अग्नि से मिलने दो।
सार
ज्ञान अतीत को राख कर देता है।
श्वास लें
तुम भार को अग्नि तक लाते हो तुम उसे राख होने देते हो
ध्यान करें
कौन-सा पुराना बोझ स्पष्ट दृष्टि से जलने को तैयार है?
साथ ले जाएँ
अतीत की एक चीज़ लिखो जिसे तुम अग्नि को सौंपने को तैयार हो।