कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः |
एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः ||६-१०||
yogī yuñjīta satatamātmānaṃ rahasi sthitaḥ .
ekākī yatacittātmā nirāśīraparigrahaḥ ||6-10||
।।6.10।। शरीर और मन को संयमित किया हुआ योगी एकान्त स्थान पर अकेला रहता हुआ आशा और परिग्रह से मुक्त होकर निरन्तर मन को आत्मा में स्थिर करे।।
सुनें
योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः |
एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः ||६-१०||
yogī yuñjīta satatamātmānaṃ rahasi sthitaḥ .
ekākī yatacittātmā nirāśīraparigrahaḥ ||6-10||
BG 6.10
समाधान करें
आसपास लोगों के होते हुए भी, एक एकांत है जिसमें तुम भीतर प्रवेश कर सकते हो। अभी उस भीतरी अकेलेपन में क़दम रखो।
सार
उस एकांत को पाओ जो सदा भीतर है।
श्वास लें
तुम भीतरी एकांत में प्रवेश करते हो तुम चाहना और स्वामित्व छोड़ते हो
ध्यान करें
कहाँ तुम भीतर एकांत पा सकते हो, भले अकेले न हो सको?
साथ ले जाएँ
उस शांत भीतरी कक्ष से लिखो जिसमें केवल तुम प्रवेश कर सकते हो।