कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः |
न चातिस्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन ||६-१६||
nātyaśnatastu yogo.asti na caikāntamanaśnataḥ .
na cātisvapnaśīlasya jāgrato naiva cārjuna ||6-16||
।।6.16।। परन्तु, हे अर्जुन ! यह योग उस पुरुष के लिए सम्भव नहीं होता, जो अधिक खाने वाला है या बिल्कुल न खाने वाला है तथा जो अधिक सोने वाला है या सदा जागने वाला है।।
सुनें
नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः |
न चातिस्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन ||६-१६||
nātyaśnatastu yogo.asti na caikāntamanaśnataḥ .
na cātisvapnaśīlasya jāgrato naiva cārjuna ||6-16||
BG 6.16
समाधान करें
न बहुत अधिक, न बहुत कम। कृष्ण चरम नहीं, कोमल मध्य माँगते हैं। अभी वहीं विश्राम करो।
सार
न बहुत अधिक, न बहुत कम — मध्य।
श्वास लें
तुम मध्य पाते हो तुम चरम की ओर खिंचाव छोड़ते हो
ध्यान करें
कहाँ तुम मध्य पाने के बजाय अति या न्यूनता करते हो?
साथ ले जाएँ
एक स्थान लिखो जहाँ तुम संयम में लौट सको।