कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु |
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ||६-१७||
yuktāhāravihārasya yuktaceṣṭasya karmasu .
yuktasvapnāvabodhasya yogo bhavati duḥkhahā ||6-17||
।।6.17।। उस पुरुष के लिए योग दु:खनाशक होता है, जो युक्त आहार और विहार करने वाला है, यथायोग्य चेष्टा करने वाला है और परिमित शयन और जागरण करने वाला है।।
सुनें
युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु |
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ||६-१७||
yuktāhāravihārasya yuktaceṣṭasya karmasu .
yuktasvapnāvabodhasya yogo bhavati duḥkhahā ||6-17||
BG 6.17
समाधान करें
खाने, विश्राम और काम में एक सरल संतुलन चुपचाप दुःख को घोल देता है। उस संतुलन को यहाँ टटोलो।
सार
संतुलन ही दुःख को घोल देता है।
श्वास लें
तुम अपना संतुलन पाते हो तुम अति का तनाव छोड़ते हो
ध्यान करें
तुम्हारे भीतर कौन-सा दुःख केवल संतुलन से बाहर होने से आता है?
साथ ले जाएँ
एक संतुलन लिखो जिसकी तुम्हारी देह या मन माँग कर रहा है।