कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि |
ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः ||६-२९||
sarvabhūtasthamātmānaṃ sarvabhūtāni cātmani .
īkṣate yogayuktātmā sarvatra samadarśanaḥ ||6-29||
।।6.29।। योगयुक्त अन्त:करण वाला और सर्वत्र समदर्शी योगी आत्मा को सब भूतों में और भूतमात्र को आत्मा में देखता है।।
सुनें
सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि |
ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः ||६-२९||
sarvabhūtasthamātmānaṃ sarvabhūtāni cātmani .
īkṣate yogayuktātmā sarvatra samadarśanaḥ ||6-29||
BG 6.29
समाधान करें
वही स्वयं जो तुममें साँस लेता है, हर प्राणी में साँस लेता है। अपने और संसार के बीच की रेखा को नरम करो।
सार
एक ही स्वयं सब प्राणियों में बसता है।
श्वास लें
तुम सबमें स्वयं से मिलते हो तुम बीच की रेखा को घोलते हो
ध्यान करें
कहाँ तुम अपने और दूसरे के बीच कठोर सीमा खींचते हो?
साथ ले जाएँ
एक प्राणी लिखो जिसके साथ तुम भिन्न व्यवहार करते यदि वह तुम होता।