कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
श्रीभगवानुवाच |
पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते |
न हि कल्याणकृत्कश्चिद् दुर्गतिं तात गच्छति ||६-४०||
śrībhagavānuvāca .
pārtha naiveha nāmutra vināśastasya vidyate .
na hi kalyāṇakṛtkaścid durgatiṃ tāta gacchati ||6-40||
।।6.40।। श्रीभगवान् ने कहा -- हे पार्थ ! उस पुरुष का, न तो इस लोक में और न ही परलोक में ही नाश होता है; हे तात ! कोई भी शुभ कर्म करने वाला दुर्गति को नहीं प्राप्त होता है।।
सुनें
श्रीभगवानुवाच |
पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते |
न हि कल्याणकृत्कश्चिद् दुर्गतिं तात गच्छति ||६-४०||
śrībhagavānuvāca .
pārtha naiveha nāmutra vināśastasya vidyate .
na hi kalyāṇakṛtkaścid durgatiṃ tāta gacchati ||6-40||
BG 6.40
समाधान करें
भले की ओर किया कोई सच्चा प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता — न इस लोक में, न किसी में। तुमने जो भी आज़माया, वह गिना जाता है। उसी में विश्राम करो।
सार
कोई शुभ प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।
श्वास लें
तुम भरोसा करते हो कि तुम्हारा प्रयास गिना जाता है तुम विफलता का भय छोड़ते हो
ध्यान करें
कौन-सा प्रयास तुम्हें व्यर्थ लगने का डर था जो था नहीं?
साथ ले जाएँ
जो अंश छोड़ना चाहता है, उसके लिए प्रोत्साहन का एक शब्द लिखो।