कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय |
मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव ||७-७||
mattaḥ parataraṃ nānyatkiñcidasti dhanañjaya .
mayi sarvamidaṃ protaṃ sūtre maṇigaṇā iva ||7-7||
।।7.7।। हे धनंजय ! मुझसे श्रेष्ठ (परे) अन्य किचिन्मात्र वस्तु नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत् सूत्र में मणियों के सदृश मुझमें पिरोया हुआ है।।
सुनें
मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय |
मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव ||७-७||
mattaḥ parataraṃ nānyatkiñcidasti dhanañjaya .
mayi sarvamidaṃ protaṃ sūtre maṇigaṇā iva ||7-7||
BG 7.7
समाधान करें
जो कुछ तुम देखते हो, सब एक अदृश्य सूत्र में पिरोया है। सूत्र अनदेखा है, फिर भी सबको थामे है। उस सूत्र को टटोलो।
सार
यह सब एक ही सूत्र में पिरोया है।
श्वास लें
तुम अदृश्य सूत्र को टटोलते हो तुम उस पर भरोसा करते हो जो सबको जोड़े रखता है
ध्यान करें
कौन-सा अदृश्य सूत्र तुम्हारे जीवन की बिखरी चीज़ों को जोड़ता है?
साथ ले जाएँ
उस सूत्र को लिखो जिसे तुम चीज़ों की सतह के नीचे अनुभव करते हो।