कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च |
मूध्न्यार्धायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम् ||८-१२||
sarvadvārāṇi saṃyamya mano hṛdi nirudhya ca .
mūdhnyā^^rdhāyātmanaḥ prāṇamāsthito yogadhāraṇām ||8-12||
।।8.12।। सब (इन्द्रियों के) द्वारों को संयमित कर मन को हृदय में स्थिर करके और प्राण को मस्तक में स्थापित करके योगधारणा में स्थित हुआ।।
सुनें
सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च |
मूध्न्यार्धायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम् ||८-१२||
sarvadvārāṇi saṃyamya mano hṛdi nirudhya ca .
mūdhnyā^^rdhāyātmanaḥ prāṇamāsthito yogadhāraṇām ||8-12||
BG 8.12
समाधान करें
इंद्रियों के सब द्वार बंद करो। मन को हृदय में समेटो। अपने पूरे स्वयं को एक स्थिर बिंदु में खींचो।
सार
द्वार बंद करो; हृदय में समेटो।
श्वास लें
तुम सब कुछ भीतर समेटते हो तुम उस सबको हृदय में विश्राम देते हो
ध्यान करें
अपनी सब बिखरी ऊर्जा को घर समेटना कैसा लगता?
साथ ले जाएँ
अपनी छाती के केंद्र की समेटी हुई स्थिरता से लिखो।