कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् |
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ||८-१३||
omityekākṣaraṃ brahma vyāharanmāmanusmaran .
yaḥ prayāti tyajandehaṃ sa yāti paramāṃ gatim ||8-13||
।।8.13।। जो पुरुष ओऽम् इस एक अक्षर ब्रह्म का उच्चारण करता हुआ और मेरा स्मरण करता हुआ शरीर का त्याग करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।।
सुनें
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् |
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ||८-१३||
omityekākṣaraṃ brahma vyāharanmāmanusmaran .
yaḥ prayāti tyajandehaṃ sa yāti paramāṃ gatim ||8-13||
BG 8.13
समाधान करें
एक ही ध्वनि — ॐ — को अपने में से गूँजने दो, जिसे भी छूए उसे शांत करते हुए। उसे अपनी छाती में अनुनादित होते अनुभव करो।
सार
एक ध्वनि, सबको धारण करती, अनुनादित होती है।
श्वास लें
तुम ध्वनि को समेटते हो तुम ॐ को अपने में से गूँजने देते हो
ध्यान करें
जब एक ध्वनि मौन को भरती है, तो तुममें क्या बैठ जाता है?
साथ ले जाएँ
ध्वनि के मिटने पर लिखो कि उसने क्या छोड़ा — या उसी में विश्राम करो।