कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
कर्मण्येवाधिकारस्ते
You have the right to act...
इस श्लोक पर निर्देशित ध्यान: शांत हो जाइए, इसके अर्थ के साथ श्वास लीजिए, मौन में विश्राम कीजिए, और इसके सार को अपने दिन में ले जाइए।
यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत् |
यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम् ||९-२७||
yatkaroṣi yadaśnāsi yajjuhoṣi dadāsi yat .
yattapasyasi kaunteya tatkuruṣva madarpaṇam ||9-27||
।।9.27।। हे कौन्तेय ! तुम जो कुछ कर्म करते हो, जो कुछ खाते हो, जो कुछ हवन करते हो, जो कुछ दान देते हो और जो कुछ तप करते हो, वह सब तुम मुझे अर्पण करो।।
सुनें
यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत् |
यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम् ||९-२७||
yatkaroṣi yadaśnāsi yajjuhoṣi dadāsi yat .
yattapasyasi kaunteya tatkuruṣva madarpaṇam ||9-27||
BG 9.27
समाधान करें
आज तुम जो भी करो, खाओ या दो, उसे अर्पण की तरह रखा जा सकता है। हर कर्म को चुपचाप पवित्र होने दो।
सार
जो भी करो, उसे अर्पण की तरह करो।
श्वास लें
तुम अगला कर्म उठाते हो तुम उसे किसी बड़े को अर्पित करते हो
ध्यान करें
कौन-सा सामान्य कर्म पवित्र हो सकता यदि तुम उसे अर्पित करो?
साथ ले जाएँ
आज का एक कर्म लिखो जिसे तुम अर्पण की तरह करोगे।