यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम् |
यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम् ||१५-१२||
yadādityagataṃ tejo jagadbhāsayate.akhilam . yaccandramasi yaccāgnau tattejo viddhi māmakam ||15-12||
।।15.12।। जो तेज सूर्य में स्थित होकर सम्पूर्ण जगत् को प्रकाशित करता है तथा जो तेज चन्द्रमा में है और अग्नि में है, उस तेज को तुम मेरा ही जानो।।
15.12 यत् which? आदित्यगतम् residing in the sun? तेजः light? जगत् the world? भासयते illumines? अखिलम् whole? यत् which? चन्द्रमसि in the moon? यत् which? च and? अग्नौ in the fire? तत् that? तेजः light? विद्धि know? मामकम् Mine.Commentary The immanence of the Lord as the allilluminating light of consciousness is described in this verse.I am the cause and the source of the light by which the sun illumines the world? as also the reflected light of the sun in the moon and that of fire.Tejah Light Th
Non-dualism. The individual self and Brahman are one. The world is appearance (maya). Liberation through knowledge.
।।15.12।।सबको प्रकाशित करनेवाली अग्नि? सूर्य आदि ज्योतियाँ भी जिस परमपदको प्रकाशित नहीं कर सकतीं? जिस परमपदको प्राप्त हुए मुमुक्षुजन फिर संसारकी ओर नहीं लौटते? जैसे घट आदिके आकाश महाकाशके अंश हैं? वैसे ही उपाधिजनित भेदसे विभिन्न हुए जीव? जिस परमपदके ( कल्पितभावसे ) अंश हैं? उस परमपदका? सर्वात्मत्व और समस्त व्यवहारका आधारत्व? बतलानेकी इच्छासे भगवान् चार श्लोकोंद्वारा संक्षेपसे विभूतियोंका वर्णन करते हैं --, जो तेजदीप्ति प्रकाश? सूर्यमें स्थित हुआ अर्थात् सूर्यके आश्रित हुआ समस्त जगत्को प्रकाशित करता है? जो प्रकाश करनेवाला तेज शशाङ्क -- चन्द्रमामें स्थित है और जो अग्निमें वर्तमान है? उस तेजको तू मुझ विष्णुकी अपनी ज्योति समझ। अथवा जो तेज यानी चैतन्यमय ज्योति? सूर्यमें स्थित है? तथा जो चन्द्रमा और अग्निमें स्थित है? उस तेजको तू मुझ विष्णुकी स्वकीय ( चेतनमयी ) ज्योति समझ। पू0 -- वह चेतनमयी ज्योति तो चराचर? सभी पदार्थोंमें समानभावसे स्थित है? फिर यह विशेषता कैसे बतलायी कि जो तेज सूर्यमें स्थित है इत्यादि। उ0 -- सत्त्व -- स्वच्छताकी अधिकतासे उनमें अधिकता सम्भव होनेके कारण यह दोष नहीं है क्योंकि सूर्य आदिमें सत्त्वअत्यन्त प्रकाश अत्यन्त स्वच्छता है? अतः उनमें ही ब्रह्मज्योति अत्यन्त प्रत्यक्ष प्रतिभासित होती है? इसीसे उनकी विशेषता बतलायी गयी है। यह बात नहीं कि वहीं कुछ बह्मज्योति अधिक है। जैसे संसारमें देखा जाता है कि समान भावसे सम्मुखसामने स्थित होनेपर भी? काष्ठ या भित्ति आदिमें मुखका प्रतिबिम्ब नहीं दीखता? पर दर्पण आदि पदार्थमें? जो जितना स्वच्छ और स्वच्छतर होता है उसमें उसी तारतम्यसे? स्वच्छ और स्वच्छतर दीखता है? वैसे ही ( इस विषयमें समझो )।
(Showing excerpt)
15.12 That light in the sun which illumines the whole world, that which is in the moon, and that which is in fire,-know that light to be Mine.
This interpretation draws on the Advaita tradition and may not represent the view of any single school. For authoritative guidance within a specific tradition, seek a qualified teacher.
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